4 लोगों की हत्या की साजिश | माँ के साथ 3 बच्चों की गयी जान

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क्राइम खबर में आज आपको बताएँगे कि आगरा में हुई 4 लोगों की हत्या की साजिश कैसे रची गयी ?

रेखा राठौर को जन्म देते ही उसकी माँ भगवान् देवी इस दुनिया को छोड़ कर चली गयी. रेखा की हालत भी अच्छी नहीं थी, बचने की उम्मीद कम थी, लेकिन रेखा की दादी गंगा देवी ने उसे बचाने के लिए दिन रात एक कर दिया.

पिता विनोद ने दूसरी शादी कर ली और अपनी पत्नी नीलम के साथ छत्तीसगढ़ जाकर रहने लगे.  

रेखा की दादी गंगा देवी ने ही उसे पाल पोसकर बड़ा किया. जब रेखा शादी लायक हुई तो उन्होंने एक अच्छा सा लड़का देख कर उसकी शादी भी कर दी.

रेखा की शादी सुनील से हो गयी. शादी के बाद उनके तीन बच्चे भी हुए, दो बेटे टुक टुक, पारस और बेटी माही.   

लेकिन शादी के तेरह साल बाद अचानक रेखा ने सुनील से तलाक लेने का फैसला कर लिया. उसने अपना ये फैसला चाचा प्रमोद और मौसा वेदराम को बताया.

इसके बाद सारा परिवार इकठ्ठा हुआ, सबने उसे समझाया कि अकेले कैसे जियेगी, बच्चों का क्या होगा, उनकी देखभाल कैसे करेगी. परिवार का कोई भी सदस्य नहीं चाहता था कि रेखा सुनील से तलाक ले, लेकिन वो नहीं मानी. वो सिर्फ यही कह रही थी कि अब सुनील के साथ नहीं रहना.

जब रेखा ने अपना फैसला नहीं बदला तो सारा परिवार उससे नाराज़ हो गया और सुनील से अलग होने के बाद सब लोगों ने उससे मिलना जुलना बंद कर दिया.

रेखा को सुनील से अलग हुए ढाई साल बीत गए, वो अपने बच्चो के साथ अकेले आगरा के कोतवाली इलाके में रह रही थी. 

एक संतोष ही था जिसने रेखा को नहीं छोड़ा था, वो रिश्ते मे उसका भाई लगता है. रेखा बचपन से उसे राखी बांधती आयी थी, संतोष जब उससे मिलने घर पर आता था तो वो उससे अपने परिवार की भी खोज खबर ले लेती थी.

लेकिन 22 जुलाई गुरुवार को उसके घर से चार लाशें बरामद हुईं. रेखा और उसके तीनो बच्चों की किसी ने हत्या कर दी थी.  

पुलिस ने इस हत्याकांड की जांच करना शुरू किया तो उन्होंने रेखा की पिछली जिन्दगी के बारे में भी पता किया. उसकी काल डिटेल्स और सोशल मीडिया अकाउन्ट्स भी खंगाले गए.

पता चला कि दिल्ली की रहने वाली प्रीती नाम की एक महिला से उसकी बात होती थी. जब प्रीती से पूंछताछ हुई तो एक चोंकाने वाली बात पता चली और वो ये कि रेखा ने सना खान के नाम से एक फर्जी फेसबुक आईडी बना रखी थी.  

तीन साल पहले फेसबुक के जरिये उसकी दोस्ती जुनैद से हो गयी थी वो रामपुर में रहता है और पुराने बाहन खरीदने बेचने का काम करता है. फेसबुक पर चैटिंग से शुरू हुई बातचीत बाद में फ़ोन पर होने लगी थी.

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ढाई साल पहले जब उसके पति सुनील को इस बारे में पता चला था तो घर में बहुत झगडा हुआ था और उसने रेखा का मोबाइल भी तोड दिया था. बाद में इसी वजह से वो अपने पति से अलग हो गयी थी, उस वक़्त उसके परिवार वालों ने उसे समझाया था लेकिन रेखा ने किसी की बात नहीं मानी.

जुनैद ने पुलिस को बताया कि बुधवार दोपहर 12 बजे उसकी रेखा से बात हुई थी. रेखा ने कहा था कि वो नहाने जा रही है, इसके बाद पूजा करेगी. जुनैद ने दोबारा फोन किया तो रेखा ने फोन नहीं उठाया और दो बजे उसका फ़ोन बंद हो गया.

रेखा के घर तक आने  के दो रास्ते हैं पुलिस इन दोनों रास्तों के CCTV फुटेज भी खंगाल रही थी. यहाँ पर एक जूता फैक्ट्री के बाहर एक CCTV कैमरा लगा हुआ था, इसका फुटेज चेक करने पर पता चला कि एक युवक रेखा का लेपटोप वाला बैग लेकर जा रहा है, जब उस व्यक्ती की पहचान की गयी तो पता चला कि वो संतोष राठोर है.

क्या हत्या की साजिश रचने वाला संतोष ही था ?

रेखा के रिश्ते का भाई संतोष राठोर, जिसे रेखा बचपन से राखी बंधती आ रही थी.

पुलिस उसके घर गयी तो पता चला कि वो नॉएडा जाने का बोलकर निकला है, उसके घर पर रेखा की नीले रंग की एक्टिवा भी खडी हुई थी. पुलिस ने संतोष की तलाश की और उसे उसके एक साथी वीरू के साथ पकड़ लिया.

27 तारीख मंगलवार को पुलिस ने खुलासा किया कि संतोष ने ही अपने दो साथियों के साथ मिलकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया था, दुसरे साथी का नाम अंशुल है उसे भी बाद में गिरफ्तार कर लिया गया.  

ये तीनों 21 जुलाई को दिन में साढ़े बारह बजे रेखा के घर पर पहुंचे थे, रेखा उस समय ऊपर पूजा कर रही थी, उसके बड़े बेटे टुक-टुक ने दरवाजा खोला और ये तीनो नीचे ही बैठ गए.

पूजा करके रेखा ने तीनो को ऊपर बुला लिया और टुक-टुक को समोसे लेने बाज़ार भेज दिया. संतोष अपने साथ नींद की गोलियां लेकर आया था जो उसने दूध में डाल दी थी.

रेखा और बच्चों ने दूध पिया लेकिन गोलियों का असर कम हुआ, वो किसी काम के लिए अपने कमरे में गई तो संतोष भी उसके पीछे-पीछे चला गया, संतोष ने उसका मुंह दबाया और उसकी गर्दन में कैंची मार दी. टुक टुक जब बाज़ार से बापस आया, उसने माँ के चीखने की आवाज सुनी तो भागकर ऊपर आया.

सोफे पर बैठे संतोष के साथी वीरू और अंशुल उसे पकड़ कर स्टोर रूम में ले गये और उसे भी मार डाला.

रेखा का दूसरा बेटा पारस और बेटी माही नीचे थे. इन लोगों ने बाद में उनकी भी जान ले ली.

इसके बाद ये तीनों रेखा का मोबाइल, लेपटोप, चांदी की पायल और नगदी लेकर चित्रकूट भाग गए.

अब सवाल ये है की संतोष ने ऐसा क्यों किया ?

दरअसल संतोष ने रेखा से दो लाख रूपए उधार लिए थे, इसके अलावा भी वो उससे पैसे लेता रहता था. रेखा ने अपनी एक्टिवा भी उसे बेच दी थी जिसके पैसे भी संतोष पर बाकी थे.

अब संतोष ये पैसे लौटा नहीं रहा था और रेखा फोन कर करके तगादा कर रही थी. रेखा जब उसे फ़ोन करती थी तो उसे भला बुरा बोलती थी और उसने एक बार उसे कुत्ता भी बोल दिया था, जो उसे बहुत बुरा लगा था.  

संतोष के पास उधार चुकाने के लिए पैसे नहीं थे, इसलिए उसने 4 लोगों की हत्या की साजिश रच डाली.   

संतोष ने अंशुल और वीरू को लूट का लालच देकर अपने साथ मिला लिया था.

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