विकास दुबे का वध – उचित या अनुचित Vikas Dubey Encounter – Fair Or Unfair

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कानपुर कांड के बाद विकास दुबे (Vikas Dubey) की मौत से कुछ लोगो की आत्मा आहत है वो इस पूरे घटनाक्रम पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं और इसे अनुचित ठहरा रहे हैं आज मै उन सब लोगो के प्रश्नों का उत्तर देकर उनकी आत्मा को शांत करने का प्रयास करूँगा मै ये बताऊंगा कि विकास दुबे (Vikas Dubey) का वध क्यों उचित है ?

विकास दुबे (Vikas Dubey) का वध कैसे हुआ ?

कानपूर कांड में विकास दुबे (Vikas Dubey) के साथ रहे  पांच अपराधी पहले ही उत्तर प्रदेश  पुलिस के साथ एनकाउंटर में ढेर हो चुके थे और 10 जुलाई की सुबह सूरज निकलने के साथ ही विकास दुबे (Vikas Dubey) के जीवन का भी अंत हो गया.

कहानी ये है कि जब विकास दुबे (Vikas Dubey) को उज्जैन से गिरफ्तार करने के बाद कानपुर लाया जा रहा था तब जिस कार में वो बैठा था उसके सामने गाय भैसों का एक झुंड आ गया उन्हें बचाने के लिए ड्राईवर ने कार को अचानक मोड़ा, जिससे हादसा हुआ और कार पलट गयी . कानपुर के पास भौंती में जब गाड़ी पलटी तो मौके का फायदा उठाकर विकास हथियार छीनकर भागने लगा, पुलिस ने विकास दुबे (Vikas Dubey) को पकड़ने की कोशिश की, उसे घेर लिया और सरेंडर करने को कहा लेकिन वह फायरिंग करने लगा. कानपुर पुलिस और एसटीएफ की जवाबी फायरिंग में विकास दुबे (Vikas Dubey) बुरी तरह जख्मी हुआ  उसको चार गोलियां लगी विकास को कानपुर के हैलट अस्पताल ले जाया गया जहाँ डॉक्टर्स ने उसे brought dead declare कर दिया अस्पताल पहुँचने से पहले ही उसकी मौत हो गयी थी पुलिस के चार जवान भी घायल हुए जिनका इलाज चल रहा है.  

ठीक ऎसी ही कहानी है विकास दुबे (Vikas Dubey) के दुसरे साथी प्रभात मिश्रा की 9 जुलाई को उत्तरप्रदेश पुलिस द्वारा उसे ट्रांजिट रिमांड पर फरीदाबाद से कानपुर लाया जा रहा था, जिस गाडी में प्रभात था उस गाडी का भौंती बायपास पर टायर पंक्चर हुआ, प्रभात ने पुलिस कर्मी की गन छीनकर फायर किया और भागने की कोशिश की.

मुठभेड़ में प्रभात मिश्रा मारा गया. और एसटीएफ के दो जवान घायल हो गए.

विकास दुबे (Vikas Dubey) के तीन और साथी प्रेम प्रकाश पांडे, बबुआ दुबे और अमर दुबे का भी पुलिस मुठभेड़ में खेल ख़तम कर दिया गया. कुछ आरोपी गिरफ्तार भी हुए है.  

विकास दुबे और उसके गुर्गों की मौत की खबर मिलने के बाद बिकरू गाँव में मिठाई भी बांटी गयी.

शहीद पुलिस कर्मियों के परिवारों ने जो खोया है उसकी क्षतिपूर्ति तो कभी नहीं हो सकती लेकिन विकास दुबे (Vikas Dubey) की मौत से उन्हें न्याय ज़रूर मिला है.  

विकास दुबे (Vikas Dubey) एनकाउंटर पर किसने उठाये सवाल ?

देश की आम जनता जहाँ इन अपराधियों की मौत पर खुश है वहीँ मुट्ठीभर लोग  ऐसे भी हैं जो इस पर सवाल खड़े कर रहे हैं.

कुमार विश्वास की लेखनी का मै प्रसंशक हूँ वो लगभग 20 साल पहले हमारे गाँव के पशु मेले में होने वाले कवि सम्मेलन में कविता पाठ करने आया करते थे अपनी कविताओं के बीच में शिशुपाल के वध का किस्सा सुनाने वाले कुमार विश्वास को विकास दुबे (Vikas Dubey) का वध अनुचित लग रहा है. उन्होंने विकास दुबे के एनकाउंटर को फिल्मी कहानी बता दिया.

वो लिखते हैं  –

इनके अलावा कई ऐसे लोग हैं  जो ऐसे विलाप कर रहे हैं जैसे उनके सिर से पिता का साया उठ गया हो. विकास दुबे के मरने से अनाथ हुए ये लोग अपराधियों की मौत पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं.

ये वही लोग हैं जो विकास दुबे की गिरफ्तारी पर ये आरोप लगा रहे थे की उसे एनकाउंटर से बचाया गया है ये दोमुहे लोग उसकी मौत पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं.

ये लोग कभी न्यायपालिका का हवाला देते है तो कभी मानवाधिकार की दुहाई.

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अब सवाल तो ये भी है कि दरोगा के केबिन में बैठकर राज्य मंत्री को गोलियों से छलनी करके अगर अपराधी बेक़सूर साबित हो जाए तो क्या ऐसी न्याय प्रणाली में सुधार की आवश्यकता नहीं है ?

अगर कोई दरिंदा dsp के सिर और छाती में गोली मार दे, उसके बाद भी उसका मन न भरे और वह कुल्हाड़ी से उनके पैर काट दे तो उसके लिए कैसा मानव अधिकार ?  क्या मानव अधिकारों का लाभ लेने के लिए मनुष्य होना जरूरी नहीं ?

ये लोग प्रश्न कर रहे हैं कि क्या विकास दुबे (Vikas Dubey) को अनुचित तरीके से नहीं मारा गया है ?

ऐसा ही एक प्रश्न द्वापर में भीष्म पितामह ने भगवान् श्री कृष्ण से किया था.

जब महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ और भगवान श्री कृष्ण पितामह भीष्म से मिलने गए उस समय वाणों की शैया पर लेटे पितामह ने श्री कृष्ण से एक सवाल किया.

उन्होंने पूंछा कि  गदा युद्ध के नियम के विरुद्ध दुर्योधन की जंघा पर प्रहार करके उसे मारना क्या उचित था ?

दुःशासन की छाती को चीर देना,निहत्थे   कर्ण का  वध किया जाना क्या उचित था ?

जयद्रत के साथ छल करना,  अश्वतथामा की मौत की झूठी खबर सुनकर जब आचार्य द्रोण ने जब शस्त्र डाल दिए तब उनको मार देना क्या उचित था ?

उस समय भगवान् श्री कृष्ण ने भीष्म पितामह के प्रश्नों का जो उत्तर दिया वो विकास दुबे के वध पर उठ रहे सवालों पर भी सटीक बैठता है.

श्री कृष्ण ने कहा था कि पाप की समाप्ति के लिए हर छल उचित है  पाप का अंत आवश्यक है , वह चाहे जिस विधि से हो.

यहाँ मेरा मतलब ये बिलकुल भी  नहीं है कि विकास दुवे (Vikas Dubey) के एनकाउंटर पर जो दुरंगे लोग सवाल कर रहे हैं वो भीष्म पितामह हैं  और जिनसे सवाल किया जा रहा है वो भगवान श्री कृष्ण.

नहीं कतई नहीं. मैं जो कहना चाहता हूँ वो बस इतना ही है कि अपराध चाहे अभिमन्यु को छल से मारने का हो या द्रोपदी के चीर हरण का. अपराध ख़तम होना चाहिए उसे ख़तम करने का तरीका चाहे जो भी हो.

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