Gangster Rupinder Gandhi Biography । रुपिंदर गाँधी गैंगस्टर या मसीहा ।

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  • उसके नाम के आगे पिता ने गांधी सरनेम लगा दिया था, क्यों की उसका जन्म 2 अक्टूबर गांधी जयंती के दिन हुआ था.
  • वो फुटबाल का नेशनल प्लेयर था.
  • पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में पढाई के दौरान दूसरे छात्र उसे हीरो मानते थे.
  • जब वो महज २२ साल का था तो सर्व सहमति से उसे गाँव का सरपंच बना दिया गया था.

इसके बावजूद सिर्फ 24 साल की उम्र में उसकी हत्या कर दी गयी   

आज हम बात कर रहे हैं रुपिंदर गांधी (Gangster Rupinder Gandhi) की, एक ऐसा गैंगस्टर जिसके बारे में कहा जाता है कि उसने कभी किसी से पैसे नहीं मांगे कोई लूट की वारदात को अंजाम नहीं दिया, किसी को बेवजह परेशान नहीं किया फिर भी उसके खिलाफ लूट, ह्त्या और ह्त्या के प्रयास के कई आपराधिक मामले दर्ज थे.

आखिर क्या कारण था कि फुटबाल का ये बेहतरीन खिलाड़ी Rupinder Gandhi हथियारों से खेलने लगा और गैंगस्टर (Gangster) बन गया ?

पंजाब की खन्ना तहसील के एक गाँव रसूलपुर में हरदेव सिंह ओजला के यहाँ 2 अक्टूबर 1979 को बेटे ने जन्म लिया. उसका नाम उन्होंने रुपिंदर सिंह रखा था, लेकिन रुपिंदर का जन्म गांधी जयन्ती वाले दिन हुआ था इसलिए वे उसे रुपिंदर गांधी कहने लगे और बाद में वो रुपिंदर गांधी (Rupinder Gandhi) के नाम से ही जाना जाने लगा.

स्कूल के दिनों में रुपिंदर गांधी पढाई में बहुत होशियार था और साथ ही साथ फुटबाल का एक बेहतरीन खिलाड़ी भी. उसने नेशनल लेबल तक फूटबाल खेला था और कई मेडल्स भी जीते थे.

आगे की पढाई के लिए जब रुपिंदर ने पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में दाखिला लिया तो वहां उसका झुकाव छात्र राजनीति की तरफ हुआ और रुपिंदर ने गांधी ग्रुप ऑफ़ स्टूडेंट यूनियन के नाम से छात्र संघटन बना लिया. यहीं से रुपिंदर गांधी के जीवन की दिशा ही बदल गयी.

कहा जाता है कि रुपिंदर ने कभी किसी के साथ पहले से कुछ गलत नहीं किया लेकिन वो दूसरों की मदद के लिए मसीहा बनकर खड़ा हो जाता था. उसके पास जब कोई छात्र अपनी समस्या लेकर आता था, तो वो उसे अपने तरीके से हल करता था चाहे इसके लिए उसे गलत कदम ही क्यों न उठाना पड़े और यही कारण था कि जिसकी वजह से रुपिंदर की लोकप्रियता बड़ी और साथ ही साथ दुश्मनी भी.

रुपिंदर अपने आक्रामक रबैये के कारण ज्यादातर मामलों का हल लड़ाई झगडे से ही निकालता था. धीरे धीरे ये लड़ाई झगडे कब गेंगवार में बदल गए पता ही नहीं चला रुपिंदर के खिलाफ कई आपराधिक केस दर्ज हो गए. पुलिस से बचने के लिए उसने बापस अपने गाँव में ठिकाना बना लिया.

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रूपिंदर गांधी (Rupinder Gandhi) पुलिस के लिए एक गैंगस्टर (Gangster) बन चूका था क्योंकि उसके खिलाफ बहुत सारे आपराधिक मामले थे, लेकिन उसकी फितरत थी कि वो दूसरों की मदद के लिए किसी भी हद तक जा सकता था.

रुपिंदर गाँधी (Rupinder Gandhi) गैंगस्टर (Gangster) या मसीहा ?

वो गरीब परिवारों की मदद करता था जिस वजह से रुपिंदर गाँव के लोगो के लिए रोबिन हुड बन गया था. अपने गाँव और आसपास के इलाके में उसकी लोकप्रियता बड रही थी और महज 22 साल की उम्र में वो सरपंच चुन लिया गया.

रुपिंदर ने सरपंच बनने के बाद कई नेक काम किये. वह लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहता था, उसने कई गरीब लड़कियों की शादिया भी करवाई थी इस लिए गाँव वाले उसे बेहद पसंद करते थे.

रुपिंदर की लोकप्रियता अब कुछ लोगों की आँखो में खटकने लगी थी, इसलिए कुछ अपराध और राजनीति से जुड़े लोग उसे अपने रास्ते का रोड़ा समझने लगे थे. इन लोगों से उसकी दुश्मनी बडती जा रही थी और उसकी जान को ख़तरा भी.

उसके दोस्त हमेशा उसके साथ रहते थे और उसे अकेले कहीं भी जाने से मना करते थे, लेकिन रुपिंदर गाँधी (Rupinder Gandhi) बिलकुल बेपरवाह था. उसका मानना था कि मौत तो एक दिन आनी ही है फिर डर कर क्यों जीना. उसे लगता था कि वो किसी भी परिस्थिति से अकेले ही निपट सकता है.

5 सितम्बर 2003 को सुबह साढे आठ बजे रुपिंदर अपने एक साथी हरप्रीत सिंह के साथ सलोधी गाँव के सुरेन्द्रर पाल से मिलकर बापस आ रहा था. रुपिंदर स्कूटर चला रहा था और हरप्रीत पीछे वाली सीट पर बैठा था, जब ये लोग देहरू गाँव के पास से गुजर रहे थे तभी एक कार उनका पीछा करने लगी. उस कार ने रुपिंदर के स्कूटर को टक्कर मार दी और कार में सवार लोगों ने हवा में गोलियां भी चलाई.

इन लोगों ने रुपिंदर को मारा पीटा और अपने साथ गाडी में लेकर चले गए. हरप्रीत के बयान पर खन्ना सदर थाने में रुपिंदर के अपहरण का मामला दर्ज हुआ.

इसके चार दिन बाद 9 सितम्बर 2003 को उसकी लाश भाकड़ा नहर के पास एक पेड़ से लटकी हुई मिली पोस्ट मार्टम में पता चला कि उसके हाथ और पांव की हड्डियाँ तोड़ दी गयी थीं और उसको दो गोलियाँ भी लगीं थी.

उसके अपहरण और ह्त्या के मामले में 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिसमे लखी नाम के एक आरोपी की अहम् भूमिका थी. 

रुपिंदर गाँधी (Rupinder Gandhi) के भाई मनविंदर सिंह ने लखी को गोली मार कर भाई की मौत का बदला ले लिया था, हालाकि बाद में उनकी भी हत्या कर दी गयी.

साल 2017 में 20 अगस्त की सुबह साढे सात बजे जब मनविंदर सिंह गाँधी उर्फ़ मिन्दी अपने भतीजे के साथ खेत पर थे, तभी वहां दो नकाबपोश आये और उन्होंने मनविंदर सिंह पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं जिससे उनकी मौत हो गयी.

इस वारदात के बाद हमलावर मनविंदर की बुलेट मोटरसाइकिल लेकर फरार हो गए थे, जिन्हें बाद में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था.

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