वेबसीरीज भौकाल के असली हीरो IPS नवनीत सिकेरा की कहानी

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पिछले दिनों एम् एक्स प्लेयर पर एक वेब सीरीज आई भौंकाल !

यूपी के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट IPS नवनीत सिकेरा के जीवन पर बनी इस वेब सीरीज में उनके किरदार को नवीन सिकेरा नाम दिया गया है और जिसे निभाया है मशहूर टीवी सीरियल ‘देवों के देव महादेव’ में ‘भगवान शिव’ का किरदार निभाने वाले अभिनेता मोहित रैना ने I

इस वेब सीरीज में नायक नवीन सिकेरा (मोहित रैना अभिनीत) की मुजफ्फरनगर में पुलिस अधीक्षक के तौर पर पोस्टिंग होती है जहाँ पर ये अफसर इस कहानी के विलेन डेढ़ा बंधुओं और शौकीन खान (अभिमन्यू सिंह) के नेतृत्व वाले दो गैंग के खिलाफ जंग छेड़ता है.

कहानी में शोकीन खान एक निर्दयी, और खतरनाक अपराधी है और साथ ही साथ उसे एक धार्मिक मुसलमान के तौर पर भी दिखाया गया है.

भौंकाल में एक मुस्लिम राजनेता का किरदार है जिसकी बेष भूसा आपको आजम खान की तरह लग सकती है. इस कहानी का एक और किरदार है सलीम जो पुलिस टीम का हिस्सा है और जासूसी के लिए खलनायक शौक़ीन की टीम में शामिल होता है वो जिस तरह से अपनी ड्यूटी निभाता है उसे देखकर आपकी आँखें नम हो सकती है I

यह सीरीज नवनीत सिकेरा के मुजफ्फरनगर पोस्टिंग के दौरान शौकीन खान के एनकाउंटर पर ही केन्द्रित है  जबकि उनके कार्यकाल में मुजफ्फरनगर में कई अन्य मुठभेड़ भी हुई थी I

इसके अलावा एक चर्चित एनकाउंटर ऐसा भी था जिसको इस सीरीज में जगह नहीं दी गयी जिसके लिए कप्तान साहब बाकायदा दूल्हा दुल्हन के साथ पूरी बारात लेकर गए और ओपरेशन को अनजाम दिया I जिसके बारे में हम आगे विस्तार से आपको बताएँगे I

अब रील लाइफ से बाहर आकर बात करते हैं नवनीत सिकेरा की रियल लाइफ की 

वो उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव के रहने वाले हैं। जिन्हें अंग्रेजी ना आने की वजह से एक कॉलेज का फॉर्म नहीं मिला था।

नवनीत को कॉलेज का फार्म ना मिलने पर उन्होंने खुद से किताबें खरीद कर पढ़ाई की और अपनी मेहनत-लगन से एक ही बार में आईआईटी जैसा एग्जाम क्रैक कर दिखाया।

नवनीत सिकेरा की शख्सियत के बारे में उत्तर प्रदेश का बच्चा बच्चा जानता है

नवनीत सिकेरा एक ऐसे अफसर हैं जिनके आईपीएस बनने का किस्सा किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं I

दर असल हुआ ये कि आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग करने वाले सिकेरा जमीन के विवाद को लेकर अपने किसान पिता के साथ शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन गए वहां पर पुलिस अधिकारी ने उनके पिता के साथ बुरा व्यवहार किया ।

दोनों बापस घर तो आ गये लेकिन उसके बाद से उनके पिता अनमने से रहने लगे नवनीत सिकेरा से पिता का ये दर्द देखा नहीं गया और तभी उन्होंने पुलिस अधिकारी बनने का फैसला कर लिया I

नवनीत सिकेरा ने बिना कोचिंग के पहली बार में ही एग्जाम पास किया और आईपीएस बने

और आज उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के नाम से भी जाने जाते हैं

इनके नाम 60 से ज्यादा अपराधियों के एनकाउंटर है  सिकेरा की पोस्‍टिंग जहां भी होती है वहां क्राइम का ग्राफ नीचे आ जाता है।

आईपीएस नवनीत सिकेरा मुजफ्फरनगर जिले में 6 सितंबर 2003 से लेकर एक दिसंबर 2004 तक एसएसपी रहे। सिकेरा ने जिले में 15 माह के कार्यकाल में बड़े- बड़े इनामी और शातिर अपराधियों को मार गिराया था।

उन्होंने यहां करीब 55 बड़े अपराधियों को एनकाउंटर में ढेर किया था । इनमें 20 हजार का इनामी बदमाश शौकीन, पूर्वांचल का शातिर शैलेश पाठक, बिजनौर का छोटा नवाब, और कई कुख्यात बदमाश शामिल रहे।

शौकीन खान ने गांव के ही दो लोगों की हत्या करने के अलावा अपहरण और हत्या की कई वारदात अंजाम दी थीं, जिसके बाद शौकीन का एनकाउंटर हुआ था।

आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग करने वाले सिकेरा ने सर्विलांस के जरिए अपराधियों का खात्मा कर जिले के लोगों को बड़ी राहत दिलाई थी । थानाभवन में बिट्टू कैल का एनकाउंटर करने पर तत्कालीन डीआईजी चंद्रिका राय ने उन्हें सिकेरा के बजाए नवनीत ‘शिकारी’ कह कर संबोधित किया था।

नवनीत सिकेरा की तैनाती के बाद स्‍थानीय गैंग का खात्‍मा हो गया और क्राइम डिस्‍ट्रिक्‍ट के तौर से पहचान बना चुका मुजफ्फरनगर एक शांत जिले में बदल गया।

अब बात करते हैं ओपरेशन कालिया की

रमेश यादव उर्फ रमेश कालिया, 2004 के दौर में लखनऊ का  सबसे बड़ा माफिया डॉन था। उसने ठेकेदारों और बिल्‍डरों की रुह कंपा रखी थी। उसका आतंक इतना ज्‍यादा था कि किसी की हिम्‍मत नहीं पड़ती थी कि उसके खिलाफ कोई कुछ बोले।”

रमेश यादव उर्फ रमेश कालिया

28 अक्टूबर 2002, शाम के 5 बजे थे. सपा नेता रघुनाथ यादव अपने दो साथियों के साथ बाराबंकी से लौट रहे थे. जब उनकी एंबेंसडर कार सफेदाबाद बाजार के पास पहुंची, तो ड्राइवर लगा की एक टाटा सूमो उनका पीछा कर रही है . उसने ये बात रघुनाथ यादव को बताई . लेकिन यादव ने ड्राईवर की बात को गंभीरता से नहीं लिया  और तभी टाटा सूमो, ने एंबेसडर को ओवरटेक कर लिया. जबरदस्ती कार सड़क के किनारे रुकवाई गयी  सूमो से चार लोग निकले और कार में बैठे नेताजी पर फायरिंग शुरू कर दी. रघुनाथ समेत दो लोग मारे गए जबकि ड्राइवर और एक शख्स भाग कर अपनी जान बचा पाए

4 सितंबर 2004, लखनऊ से सटे  उन्‍नाव में सपा के बाहुबली नेता एमएलसी अजीत सिंह के गेस्‍ट हाउस पर उनके जन्‍मदिन की पार्टी चल रही थी। अजीत सिंह के चेले नशे में धुत होकर हवा में फायरिंग कर रहे थे। अचानक एक गोली अजीत सिंह के सिर के आर-पार हो गई । अब रंग में भंग पड़ चुका था. अजीत सिंह को अस्‍पताल ले जाया गया लेकिन उनकी मौत हो गयी

सपा के एमएलसी अजीत सिंह का कत्ल हुआ था. लिहाजा अजीत सिंह की मौत की खबर आग की तरह पूरे सूबे में फैल गई. मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव खुद अजीत सिंह की अंतिम यात्रा में शामिल हुए.

उस समय यूपी में रेलवे के ठेकों में अजीत सिंह का सिक्‍का चलता था, अजीत सिंह की दुश्मनी रमेश कालिया से थी,

अजीत सिंह के क़त्ल से पुलिस पर क़ातिलों को पकड़ने के लिए दबाव बढ़ने लगा. लिहाज़ा पुलिस रमेश कालिया के खिलाफ कत्ल का मामला दर्ज कर उसकी तलाश करने लगी

कालिया की तलाश में लखनऊ पुलिस ने दलबल के साथ उन्नाव के कई ठिकानों पर छापेमारी की  लेकिन हर जगह पुलिस को नाकामी ही मिली.

तभी मुलायम सिंह यादव ने एक अहम फैसला लिया. उन्होंने डीजीपी के कहने पर मुजफ्फरनगर के तेज तर्रार एसएसपी नवनीत सिकेरा को लखनऊ बुलाने का फरमान जारी कर दिया.

दिसंबर 2004 में नवनीत सिकेरा लखनऊ के एसएसपी बना दिए गए.

राजधानी के एसएसपी बनकर आए सिकेरा की छवि तेजतर्रार पुलिस अफसर की थी। सिकेरा ने टॉप 10 माफियाओं की लिस्‍ट मंगाई और धरपकड़ शुरू कर दी

कई को सलाखों के पीछे डाल दिया गया, तो कई मुठभेड़ में मार दिए गए . पुलिस की इस कार्रवाई से बदमाशों का सिडिंकेट चलाने वाले बड़े माफ़ियाओं की नींद हराम हो चुकी थी.

10 फरवरी 2005 को कालिया ने एक बिल्‍डर को फोन कर 5 लाख की रंगदारी मांगी I एसएसपी ने बिल्डर के जरिए रमेश कालिया तक पहुंचने की योजना बनाई. बिल्डर ने कालिया को फोन पर कहा कि वह पैसे देने को तैयार है कालिया ने बिल्‍डर को नीलमत्‍था के एक सुनसान इलाके में पैसे लेकर बुलाया । पुलिस की परेशानी ये थी कि वह सीधे घुसती तो कालिया को पता चल जाता। इसलिए पुलिस को अनोखा रास्‍ता अख्तियार करना पड़ा। ।

पुलिस ने प्‍लान बनाया कि वह बारात की शक्‍ल में धावा बोलेंगे।

12 फरवरी, 2005 को पुलिस ने शूटआउट की तैयारी कर ली. महिला कांस्‍टेबल दुल्‍हन बनीं तो इंस्‍पेक्‍टर ने दूल्‍हे का रूप धरा। बाकी पुलिसकर्मी बारातियों की तरह सज-धजकर तैयार हुए। कपड़ों में पिस्‍तौलें छिपाई गईं बरात कालिया के ठिकाने पर पहुंची और कालिया की घेराबंदी कर दी बारातियों के भेष में आई पुलिस ने निर्माणाधीन कोठी में घुसकर कालिया पर धावा बोल दिया

दोनों तरफ से गोलीबारी हुई और पुलिस ने 20 मिनट में कालिया और उसके दो गुर्गों का काम तमाम कर दिया। इस पूरे एनकाउंटर में 2 पुलिसकर्मी भी घायल हुए।

नवनीत सिकेरा ने ही यूपी में महिला पॉवर लाइन 1 0 9 0  शुरू किया था, यूपी में एक ऐसा भी वक्त था, जब बाहुबलियों और कुख्यात अपराधियों के सताए लोग थाने के बजाय सीधे नवनीत सिकेरा के पास पहुंचते थे।

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